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Noor World

उस रोज़ भी मैं बाकी दिनों की तरह वहाँ से गुज़र रहा था। पर आज वहाँ कुछ भीड़ लगी थी। मैंने एक दफा चलते-चलते ही झाँक के देखा पर रुका नहीं। आगे बढ़ा तो कानों में किसी की आवाज़ आयी, “बेचारा जवानी में ही बेमौत मारा गया। लगता है कोई अपना नहीं है इस बेचारे का। अब तक कोई लेने भी नहीं आया। दो घंटे से यहाँ लाश पड़ी है। अब पुलिस आएगी तो लेकर जाएगी”।

एक दफा मन हुआ कि देखूं कौन है पर देर हो रही थी सो अपने रास्ते निकल गया। दफ़्तर पहुँच के काम में लग गया। दिन भर काम करके बुरी तरह थक गया था। सीधे घर के लिए निकल गया। घर पहुंचा तो बच्चे शोर मचा रहे थे। मुझे देखते ही पास आये और गले लग गए। थोड़ी देर में हाथ मुंह धो कर तैयार हुआ। तब तक पत्नी शाम की चाय और बिसकिट्स…

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