Uncategorized

मन की ।🎈🎈🎈

मेरे अपने अनुभव

मन तू मौन नहीं रहता है ।
कितना भी चाहूँ मैं,
तू अपनी ही कहता है ।
इधर उधर डोले है,
जो मन आये बोले है ।
औरों की भी, तो … सुन ।
तू क्यों नहीं सुनता है ?
मन तू मौन नहीं रहता हैं ?

कुछ ठान लिए बैठा है ।
कुछ मान लिए बैठा है ।
इतनी भी मनमानी कैसी ? जो…
इक तरफा तेरी धुन,
क्यों सबको तू धुनता है ?
गुण औरों के भी तो गा …
बस अपनी कही सुनता है ?
मन तू मौन नहीं रहता है ।
कितना भी चाहे
तू क्यों नहीं सुनता है ….
मन तू मौन नही रहता है …। ✍️

View original post

Categories: Uncategorized

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s