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कक्का और बाँसुरी- धुन।🙏

मेरे अपने अनुभव

आज कृष्ण जन्माष्टमी है । घर में जन्माष्टमी की खूब सजावट और भक्तिमय धूम रहती । रात को मेहंदी भी लगाई जाती । शायद यहां भी नाम का असर था , चक्रधर और राधा ,हमारी मां और पिताजी का नाम । 🙏लगता है घर के एक शांत व्यक्तिव का नाम भी , कृष्ण के नाम से जुड़ता है और वो थे हमारे लालू कक्का (सबसे छोटे चाचा ) । लालू कक्का ।ललित मोहन पांडे ।जब कभी ‘अहम’ भ्रमित करता है तो लालू कक्का की याद आती है । बिल्कुल सीधा साधा व्यक्तित्व । इतने सीधे कि विश्वास नही होता। हर समय मुस्कुराते रहना । भातखण्डे संगीत विश्वविद्यालय से संगीत प्शिक्षण लिया था लालू कक्का ने बांसुरी बजाने का शौक ऐसा कि जहां भी जाते उनकी साईकल के थैले में बाँसुरी अवश्य होती । हम नजरबाग में लालू कक्का के घर में आते ही कहते कक्का बांसुरी बजाइए लालू कक्का बांसुरी…

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