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ठोढ़ी (Chimbok) – Dr. Masudul Hoq / Translated into Hindi by Dr. Karuna Panjiara

ATUNIS GALAXY POETRY

 
Poem by Dr. Masudul Hoq
 
 
ठोढ़ी (Chimbok)
 
চিবুক
মাসুদুল হক
 
নির্লিপ্ত দেহভঙ্গিমায় সারসের সন্ন্যাসকাল পূর্ণ হলে
আরো এক অন্তর্মুখী আশ্রমের দেখা পাই। মন্ত্র ও
গান ঘুরছে।
থম মেরে আছে মনসার রাগ শুষে নেয়া দুপুরপ্রতিমা। অশ্বত্থে কোটরে বিরক্ত পেঁচা অন্ধকার
খুঁজে বেড়ায়।সতীর চিবুকের সন্ধানে
মাদারগ‌ঞ্জের শিব।
ভরদুপুরে সূর্য গিলে খেয়ে
কেউ একজন
উন্মাদকণ্ঠে ডেকে চলেছে, রাখাল, রাখাল …
 
ठोढ़ी
कवि—मासुदुल हक(बांग्ला देश)
हिन्दी अनुवाद–डॉ करूणा पंजियारा
निर्लिप्त देह भंगिमा में सारस का सन्यास काल पूर्ण होकर और एक अंतर्मुखी आश्रम का पता चलता है
मंत्र और गीत घूमते रहता है
थम सा बैठा है मनसा का क्रोध सोखने वाला दोपहरी प्रतिमा
पीपल के कोटर में विरक्त उल्लू अंधेरा खोजता फिरता है
सती के ढोढ़ी की खोज में मादर गंज के शिव
भरी दोपहरी में सूरज निकलता है
कोई उन्माद कंठ में बुला रहा है राखाल ,,,,,,राखाल,,,,,,।
 
(डॉ करूणा पंजियारा
सहायक अध्यापक
बांग्ला विभाग
कोल्हान…

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