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वंशी के स्वर में | Vanshi Ke Swar Mein – Dr Kumar Vishvas

Hindi Song Lyrics

वंशी के स्वर में | जो आता है वो जाता है – डॉ कुमार विश्वास

Vanshi Ke Swar Mein Poetry, Written By Kumar Vishwas.

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वंशी के स्वर में | Vanshi Ke Swar Mein

जो आता है वो जाता है
तू किसका शोक मनाता है
उस सूर्य-जयी, उस दिशा-पुरुष
से प्रहर चार रस सने बाद
छिन जाते सारे तारे पर
अम्बर कब शोक मनाता है
जो आता है वो जाता है
इच्छवाकु वंश, भारत प्रमाण
अज, रघु दिलिप, पुरुरवा प्राण
अज, रघु, दशरथ, पुरुरवा प्राण
जिस अजिर-बिहारे रामचन्द्र
लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न संग
उर्वशियों की इच्छित समाधि
संरक्षण मांगे तनय गाधि
जिनके धनु की टंकार प्रबल
सुन कर कंपता था रावण-दल
वे जनक-सुता के चिर स्वामी
संतों के बहु-विध हितकामी
समरसता के वे विजय-केतु
साक्षी है अब तक है राम-सेतु
संतों पर नहीं सिरा जिनका
सागर पर नाम तिरा जिनका
सरयू के जल में ले समाधि
वह किसकी थाह लगाता है ?
जो आता है वो जाता है
तू किसका…

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