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जीवन के अर्धसत्य :

Retiredकलम

अजनबी शहर के अजनबी रास्ते, …मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे,

मैं बहुत देर तक यूं ही चलता रहा, तुम बहुत देर तक याद आते रहे |

ज़हर मिलता रहा ..ज़हर पीते रहे, ..रोज़ मरते रहे …रोज़ जीते रहे,

ज़िदगी भी हमें आज़माती रही, …और हम भी उसे आज़माते रहे |

  • कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने खुबसूरत है | क्योकि लंगूर और गोरिल्ला भी अपनी ओर लोगो का ध्यान आकर्षित कर लेते है..

  • कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका शरीर कितना विशाल और मज़बूत है क्योकि शमशान घाट तक आप अपने को नहीं ले सकते |

  • आप कितने लम्बे क्यों न हो जाएँ मगर आने वाले कल को आप नहीं देख सकते |

  • कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी त्वचा कितनी गोरी और चमकदार है क्योंकि अँधेरे में रौशनी की ज़रुरत पड़ती ही है |

  • कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप नहीं हँसेंगे तो सभ्य कहलायेंगे क्योंकि आप पर…

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